माशूम दिल
बहूत दिनों बाद,आज शुकून की नींद आई।बिस्तर पे लेटते ही आँख लग गई।पता भी नही चला कि कब शुबह हो गई।आज का दिन कितना ताजगी और उत्साह से भरा लग रहा है। मन खुशी से झूम रहा है,खिड़की से अंदर आती धूप ,अच्छी लग रही है।चिड़ियों का चहकना भी मुझे रास आ रहा है।और मम्मी ने भी तो अब तक उठने के लिए कोई आलार्न नही बजाया।जैसे आज सारी दुनियां मेरे मन मुताबिक चल रही हो।
आखिरकार पापा हमारे रिस्ते को मान ही गये। कितने दिनों का टॉर्चर सहने के बाद ,पापा का हमारे रिस्ते को स्वीकारना,मेरे लिए किसी गोल्ड मेडल से कम नही है।राम ने भी तो कितनी मेहनत की थी मेरे पापा को इम्प्रेस करने के लिए। आज राम का परिवार हमारे घर,शादी की बात पक्की करने आ रहे है।और सब ठीक रहा तो सगाई भी आज ही हो जायेगी।सच मे आज मैं बहूत खुश हूँ।मेरे पैर जमीन पे नही पड़ रहे हैं।
राम से मुलाकात का सिलसिला आफिस के गेट से शुरू हो गया था। वो अकॉउंटेड था,और मै सेल्स मैनेजर के पोस्ट पे जॉइन हुई थी,वो तीन साल पहले कंपनी को जॉइन किया था।और उसे प्रोडक्ट का काफी जानकारी भी थी।थोड़ा अजीब लगता है ना,अपने से कम उम्र वाले इंसान से दोस्ती करना और फिर उसी से प्यार करना।
हमे भी कहाँ पता था कि हमारी छोटी छोटी मुलाकात के किस्से,कब इतने खास हो जायेंगे।राम को पसंद करने की कोई बड़ी वजय नही है और न ही मैने कोई ऐसी लिस्ट बना रखी थी जिसमे राम फिट बैठता हो।राम एक सीधा साधा सच्चा इन्सान है।
दिल तो वैसे भी जिसे पसंद करता है, उसे ही पाना चाहता है और उसी के साथ जिंदगी जीना चाहता है।पहले पापा को एतराज था,उन्हें लगता था कि राम मेरे लिए ठीक नही है।कहाँ मेरा स्टेटस और कहाँ राम।एक छोटी जॉब से कैसे मुझे खुश रख सकता है।
कई दिनों तक हम सभी एक दूसरे के सामने अपनी अपनी बातें रखते और समझाने की कोशिश करते।न पापा अपने तजुर्बे को छोड़ना चाहते थे और न ही मै अपना दिल तोड़ कर राम को भूलाना चाहती थी।
किसी को खुश रहने के लिए एक बड़े स्टेटस का होना जरूरी हो ऐसा मुझे नही लगता।
राम मुझे समझाता की मैं अपने पापा की बात सुनू,वो बड़े है अच्छा ही सोचेंगे।हो सकता हो कि मैं अच्छा इंसान नही हूँ।तुम मुझसे प्यार करती हो,इस लिए मुझमे तुम्हे खूबियां नजर आती है।पर अंकल की बात अलग है।राम की ऐसी बातों ने ही तो मुझे प्यार मे पागल बनाया है।नही तो एक अकड़ू टाइप की लड़की को भी प्यार हो सकता हो ये बड़ा अचम्भव है।मै तो एक पड़ाखू बाली लड़की थी, जो अपने भविष्य को लेकर हमेसा से चिंतित रहती थी।उसके आस पास इतनी खुशिया थी जिसे वह नजर अंदाज करके,किताबों मे डूबी रहती।
कोई जब अच्छा लगता है, तो दिल कैसे धड़कता है,ये दुनियां कितनी अलग,कितनी खूबसूरत लगती है।जिनसे मै बेखबर थी ,अनजान थी।
लोगो के नजर मै एक सभ्य,शुसील और होशियार लड़की थी।जबकि मेरी असल की जिंदगी कितनी खोखली और खाली थी ये शिर्फ मै ही जानती थी।
मेरा माशूम दिल कितना मचलता था।कितना तड़पता था।किसी को कोई खबर नही थी।राम से मिलने के बाद लगा कि ये वही साहिल है जहाँ मै ठहर सकती हूँ।राम मुझे समझता था।बिना कहे वो मुझे सुन लेता था।एक लड़की को और क्या चाहिए,उसे सच्चा चाहने बाला हो,प्यार करने बाला हो।
आखिर कार पापा मान ही गए।जब उन्हें राम की सच्चाई पता चली की राम से बेहतर लड़का मुझे तो मिल ही नहो सकता।मेरा माशूम दिल होले से धड़क गया।
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